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शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

आपके शरीर की कुछ ऐसी बाते जिसके बारे में आपको कम पता होगा


आज मैं आपको बताने जा रहा हू शरीर से जुडी ऐसी बाते जिसके बारे में शायद आप कम ही जानते हो

1.छींकते वक्त व्यक्ति की आंखे अवश्य ही बन्द होगी।
2.जीवन भर में 25 करोड़ बार आंखे झपकाते है।
3.24 घण्टे मे हम २२,999 बार सांस लेते है।
4.मनुष्यो को उंगलियो की छाप से पहचाना जा सकता है, उसी प्रकार जानवरो को उनकी नाक की छाप से
5.मनुष्य के शरीर मे इतना फास्फोरस होता है कि माचिस की 4 डिबियां बनाई जा सकती है।
6.क्रोध के लिए चेहरे की 43 मांसपेशिया सक्रिय होती है मुस्कराने के लिए 17 मांसपेशियां अर्थात क्रोध करने से मनुष्य की अधिक उर्जा व्यय होती है मुस्कराने से कम।
7.मनुष्य का दायां पैर बाएं की अपेक्षा कुछ अधिक लम्बा होता है
8.शरीर का सबसे सखत पदार्थ इनेमल होता है जो दांत की उपर परत पर चड़ा रहता है।
9.यदि आकाश में बादल छाये हों और हम खुले मे बैठें तो भी हमारी त्वचा काली पड सकता है क्योकि बादलो के कारण धूप तो हम तक नही पहुंचेगी किन्तु सूर्य की 80% घातक पराबैंगनी किरणें आर पार निकलकर हम तक पहुंच सकता है।

ये तो थी बात हमारे शरीर की अब मै आपको लेकर चलता हू ऐसे एअरपोर्ट पर जिसे आज तक ना तो आपने देखा होगा और ना ही उसके बारे मे कभी किसी से सूना होगा मुझे भी इसके बारे मे आज ही पता चला है कैरेबियन सागर मे स्थित है ‘किंगडम ऑफ नीदरलैंड’ के अधीन द्वीपीय देश ‘सैंट मार्टिन’। यहाँ पर स्थित है दुनियाँ का सबसे अजीब एयरपोर्ट ‘प्रिंसेज जूलियाना इंटरनेशनल एयरपोर्ट’। इस एयरपोर्ट मे अजीब यह है कि इसके रनवे के ठीक सामने एयरपोर्ट कैम्पस के बाहर ‘महो बीच’ स्थित है, जहां पर काफी लोग हमेशा मौजूद रहते हैं। और एयरपोर्ट पर जहाज उतरते समय इस बीच से कुछ ही मीटर की ऊंचाई से होकर गुजरते हैं। आप भी देखे उस एअरपार्ट को और बतायें कैसा लगा आपको ये अजीबो गरीब एअरपोर्ट










मजा आया न फोटो देख कर अब इस विडियो को भी देखिये 

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अमावस की रात अजीबो गरीब जानकारी किन्तु सत्य


आज मुझे नेट से बहुत ही अच्छी जानकारी मिली है जो शायद आपको भी न पता हो


छम... छम... छम... पायल की ऐसी आवाज किसी के भी मन बरबस ही लुभा लेती है। जब कोई लड़की पायल पहनकर चलती है तो उससे निकलने वाला मधुर स्वर किसी संगीत से कम प्रतीत नहीं होता। सामान्यत: सभी लड़कियां पायल पहनती हैं। विवाहित महिलाओं के लिए तो यह आवश्यक होता है कि वे पायल पहनें।
महिलाओं के लिए पायल पहनना काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इसके पीछे कई कारण मौजूद हैं।
पायल महिलाओं के सोलह श्रंगार में अहम भूमिका निभाती है। पायल पहनने के पीछे यह वजह है कि प्राचीन काल में महिलाओं को पायल एक संकेत मात्र के लिए पहनाई जाती थी। जब घर के सभी सदस्य एक साथ बैठे होते थे तब यदि कोई पायल पहनी स्त्री वहां आती थी तो उसकी छम-छम आवाज से सभी को अंदाजा हो जाता कि कोई महिला उनकी ओर आ रही है। जिससे वे सभी व्यवस्थित रूप से आने वाली महिला का स्वागत कर सके, उसे सम्मान दे सके।
पायल की छम-छम अन्य लोगों के लिए एक इशारा ही है, इसकी आवाज से सभी को यह एहसास हो जाता है कि कोई महिला उनके आसपास है अत: वे शालीन और सभ्य व्यवहार करें। स्त्री के सामने किसी तरह की कोई अभद्रता ना हो जाए। ऐसी सारी बातों को ध्यान में रखते हुए लड़कियों के पायल पहनने की परंपरा लागू की गई। साथ ही पायल की आवाज से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम हो जाता है और दैवीय शक्तियों सक्रीय रहती है।
पुराने समय में विवाह के बाद पति के घर में बहु के आने के लिए पूरी स्वतंत्रता नहीं रहती थी। साथ ही वह किसी से खुलकर बात नहीं कर पाती थी। ऐसे में जब वह घर में कही आती-जाती तो बिना उसके बताए भी पायल की छम-छम से सभी सदस्य समझ जाते थे कि उनकी बहु वहां आ रही है।
पायल की धातु हमेश पैरों से रगड़ाती रहती है जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मजबूती मिलती है। साथ ही पायल पहनने से स्त्रियों का आकर्षण कहीं अधिक बढ़ जाता है।


विवाह में कई परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। कुछ परंपराएं धर्म से जुड़ी हैं तो कुछ प्रथाएं धर्म और विज्ञान से। सामान्यत: दूल्हा-दुल्हन को विवाह के दिनों पान खिलाने की परंपरा प्रचलित है।यूं तो पान को मुख का आभूषण माना जाता है और काफी लोगों का शौक होता है पान खाना। सभी मांगलिक कार्यों में भोजन के बाद पान खिलाया जाता है। पान भगवान को भी अर्पित किया जाता है। पूजन आदि में पान भगवान के मुख शुद्धि कराने के लिए मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है।
पान एक औषधि भी है, इसे नियमित रूप से खाने पेट संबंधी कई बीमारियां आपसे दूर ही रहती है। इससे अपच, कब्ज, एसीडीटी जैसी समस्या नहीं होती।विवाह के दौरान दूल्हा और दुल्हन को कई तरह के व्यंजन खाने पड़ते हैं, कई बार कुछ भोज्य पदार्थ कब्ज या गैस की तकलीफ देना शुरू कर देता है, ऐसे में नियमित रूप से पान खाने से ऐसी कोई समस्या नहीं और नवयुगल का पेट ठीक रहता है और पान खाने से मुख की सुंदरता भी बढ़ती है। पान बनाने में उपयोग की जाने वाली सामग्री पेट को साफ रखने में अहम भूमिका निभाती है।इसी वजह से विवाह में दूल्हा-दुल्हन को अनिवार्य रूप से पान खिलाया जाता है

शादी... विवाह... में सिर्फ दूल्हा-दुल्हन ही नहीं बल्कि दोनों के परिवार का हर सदस्य उत्साह और उमंग के साथ खुशियां मनाता है। एक ओर जहां शादी के कई पारंपरिक रीति-रिवाज जुड़े हैं, वहीं आधुनिक शादियों में दूल्हे के जूते चूराने की भी एक परंपरा देखने में आती है। इस परंपरा का उद्देश्य होता है कि दोनों परिवारों के मध्य आपसी प्रेम बना रहे और समारोह में थोड़ी हंसी-मस्ती का माहौल बन जाए। इस परंपरा में दूल्हे के जूते दुल्हन की बहनें और सहेलियां चुरा लेती हैं। जूते लौटाने पर बदले दूल्हे को उन्हें रुपए देने होते हैं। इस प्रथा एक खेल की तरह ही है। इसके लिए दुल्हन की बहनें और सहेलियां पूरी कोशिश करती हैं कि किसी भी तरह दूल्हे के जूते हाथ आ जाए और दूल्हे के भाई और दोस्त यह कोशिश करते हैं कि दूल्हे के जूते चोरी ना हो सके। यह दोनों ही परिवार की प्रतिष्ठा का मुद्दा भी होता है।


दुनियाभर में अधिकांश लोग अपनी कलाई पर घड़ी बांधते हैं। अधिकतर पुरुष बाएं हाथ यानि लेफ्ट हैंड पर ही घड़ी बांधते हैं, जबकि बहुत कम पुरुष सीधे हाथ में घड़ी बांधते हैं। वहीं महिलाएं सीधे हाथ पर घड़ी बांधना अधिक पसंद करती हैं।
हालांकि यह परंपरा किसी धर्म से संबंधित नहीं फिर भी यह काफी प्रचलित है। आखिर इसकी क्या वजह है कि पुरुष लेफ्ट हैंड की कलाई पर ही घड़ी बांधते हैं। इसके पीछे का तर्क यह है कि हम अधिकांश कार्य सीधे हाथ से ही करते हैं (लेफ्ट हैंडेड को छोड़कर)। इन कार्यों में हर प्रकार का कार्य शामिल है। कुछ भारी कार्य होते हैं तो कुछ जोखिम भरे, तो कुछ कार्य झटके वाले होते हैं। यदि ऐसे में सीधे हाथ में घड़ी बांधी जाए और इस प्रकार के कार्य किए जाते हैं तो निश्चित ही घड़ी खराब हो जाएगी। यदि कोई व्यक्ति लेखन आदि कार्य भी सीधे हाथ से करता है तब भी सीधे हाथ में घड़ी बांधना काफी परेशानियों भरा ही होगा। बाएं हाथ में घड़ी हमेशा सुरक्षित ही रहती है और हर परिस्थिति में समय देखने के लिए सुविधाजनक है।
हिंदू धर्म में अधिकांश कार्य सीधे हाथ से ही करने का विधान है। पूजादि कार्यों में भी सीधा हाथ ही उपयोग किया जाता है। ऐसे में पूजनकर्म में घड़ी से किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो इस वजह से भी घड़ी सीधे हाथ में ही पहनना पसंद किया जाता है।


सामान्यत: ऐसी मान्यता है कि रात के समय किसी लड़की को अकेले घर से बाहर नहीं भेजना चाहिए। पुराने समय में इस बात का सख्ती से पालन कराया जाता था। साथ ही अमावस की रात को तो खासतौर पर लड़की को अकेले घर से बाहर निकलना मना किया जाता था।

ऐसा माना जाता है कि अमावस की रात को नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं जो कि लड़कियों को बहुत ही जल्द अपने प्रभाव में ले लेती हैं। यहां नकारात्मक शक्ति से अभिप्राय है कि आसुरी प्रवृत्तियां। अमावस की रात बुरी शक्तियां अपने पूरे बल में होती हैं। इन शक्तियों को लड़कियां पूरी तरह प्रभावित करती हैं। जिससे वे उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करती हैं। इन शक्तियों के प्रभाव में आने के बाद लड़कियों का मानसिक स्तर व्यवस्थित नहीं रह पाता और उनके पागल होने का खतरा बढ़ जाता है।

विज्ञान के अनुसार अमावस और हमारे शरीर का गहरा संबंध है। अमावस का संबंध चंद्रमा से है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी है जिसे चंद्रमा सीधे-सीधे प्रभावित करता है। ज्योतिष में चंद्र को मन का देवता माना गया है। अमावस के दिन चंद्र दिखाई नहीं ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती है। जब चंद्र नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर के पानी में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है। इन्हीं कारणों से अमावस की रात को लड़कियों को अकेले बाहर जाने के लिए मना किया जाता था।

चंद्रमा हमारे शरीर के जल को किस प्रकार प्रभावित करता है इस बात का प्रमाण है समुद्र का ज्वारभाटा। पूर्णिमा और अमावस के दिन ही समुद्र में सबसे अधिक हलचल दिखाई देती है क्योंकि चंद्रमा जल को शत-प्रतिशत प्रभावित करता है।
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अजीबो गरीब जानकारी


दोस्तों आज में आपके लिए लाया हू इंटर नेट की दुनिया से कुछ ऐसी अजीबो गरीब जानकारी जिसे पढ़ कर आपको बहुत मजा आयेगा


आंसू बहाते हुए बच्चे की इस पेंटिंग के किस्से 1985 के करीब ब्रिटेन में काफी चर्चा में रहे। इस दौरान वहां कई घरों में आग लगने की घटनाएं घटी थीं। आश्चर्य की बात ये थी कि घरों में सबकुछ जल जाता था सिर्फ आंसू बहाते बच्चे की पेंटिंग बच जाती थी।

मतलब ये कि जहां ये पेंटिंग होती वहां आग लग जाती थी। यॉर्कशायर के एक फायरमैन ने सबसे पहले ‘द सन’ अखबार में ये बात कही थी। इसके बाद अखबार के दफ्तर में कई लोगों के इस तरह के फोन आए। बाद में अखबार वालों ने सभी लोगों से ये तस्वीर उनके दफ्तर में लाने को कहा और सभी को आग लगा दी गई।
इस तरह उन लोगों को इसकी बद्दुआ से निजात मिली। कई लोगों ने अपने घर में आग लगने का जिम्मेदार इस पेंटिंग को ठहराया। कई लोगों के घर वाले आग में मारे गए। फिर भी इस पेंटिंग में ऐसा क्या था, ये पेंटिंग किसने बनाई थी और ये बच्चे कौन था, ऐसे कई सवाल आज भी राज हैं।
रॉथेरहैम के फायर स्टेशन अधिकारी एलन विल्किनसन इस राय से सहमत नहीं थे। फिर भी उनकी पत्नी का कहना था कि बच्चे के आंसू ही पेंटिंग का जलने से बचाते थे। 1995 में डेवॉन के रिटायर्ड स्कूल मास्टर जॉर्ज मैलोरी ने पता लगाया कि ये पेंटिंग एक स्पेनिश कलाकार फ्रेंचॉट सेविले ने बनाई थी। उन्होंने डॉन बोनिलो नाम के इस बच्चे की पेंटिंग बनाई थी।
वह 1969 में उन्हें मेडरिड में भटकता हुआ मिला था। बच्चे के माता पिता आग में जल गए थे और वह बच गया था। जिस कैथलिक पादरी ने बच्चे को पहचाना था, उसने सेविले को उसे गोद लेने से मना किया था। फिर भी सेविले नहीं माने और एक दिन उनका स्टूडियो भी जल गया था। 1960-70 के दशक में बेहद पॉपुलर रही ये पेंटिंग 1985 के बाद किसी घर में नजर नहीं आई।

राज़ है गहरा
ब्रिटेन में आंसू बहाते हुए एक बच्चे की पेंटिंग काफी पॉपुलर हुआ करती थी। बाद में पता चला कि जिस घर में ये होती थी, वहां आग लग जाती। मगर, सबकुछ जलकर खाक हो जाने के बाद सिर्फ ये पेंटिंग बच जाती थी। इसके पीछे क्या कारण था ये आज तक कोई नहीं समझ सका है।

कुछ ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज में हाईटैक वाशिंग मशीनें रखी गई हैं जो कपड़े धुलने का चक्र पूरा होने पर इसका इस्तेमाल करने वाले को ईमेल कर देती हैं कि आकर कपड़े ले जाओ। इन डिजिटल मशीनों के निर्माताओं का कहना है कि छात्र जब धोने के लिए कपड़े ढोकर लाते हैं और सभी मशीनों को व्यस्त देखते हैं तो उन्हें बहुत निराशा होती है।


अब उन्हें ऐसी मायूसी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सबसे पहले लॉन्ड्रीव्यू मशीनें लीड्स यूनिवर्सिटी में इंस्टाल की गई थी। वहां के छात्र कपड़े धोने के लिए ले जाने से पहले एक वेबसाइट पर खोलकर देख लेते थे कि मशीनें खाली हैं या नहीं।


इसके बाद छात्र एक सामान्य मशीन की तरह उनमें कपड़े भर देते। बाद में कपड़े धुलने पर उठाए जाने के लिए उन्हें एक ईमेल मिलती थी। यह स्कीम इतनी सफल साबित हुई कि अब ऐसी मशीनें 28 यूनिवर्सिटियों में इंस्टाल की जा चुकी है।


इंग्लैंड का एक कॉलेज अपने अजीबोगरीब ऑफर के कारण छात्रों को असफल होने के लिए उकसाने की आलोचना झेल रहा है। दरअसल, कॉलेज ने फेल होने वाले छात्रों को पांच हजार पाउंड देने की बात कही है। अपनी बात में वजन डालते हुए कॉलेज प्रशासन ने कहा कि उनके छात्र फेल ही नहीं होते, यदि ऐसा हुआ तो वे पांच हजार पाउंड देने को तैयार हैं।

ब्लैकबर्न कॉलेज का दावा है कि 27 साल से कॉलेज की ‘ए’ लेवल परीक्षाओं का औसत रिजल्ट ए-ग्रेड में आ रहा है। यह ऑफर इसलिए भी दिया गया है कि कॉलेज छात्रों के लिए परीक्षाएं आसान होती जा रही हैं। कॉलेज के ऑफर की आलोचना करने वालों का कहना है पढ़ाई और परीक्षाओं का स्तर सुधारने के बजाए कॉलेज अपने छात्रों को फेल होने के लिए उकसा रहा है। यह तो लोगों के टैक्स का दुरुपयोग भी है।

कमजोर छात्रों को भीख है ये ऑफर

कॉलेज की नई स्कीम को नजरअंदाज कर 400 ए-लेवल छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि ऐसा नहीं किया तो वे अगली परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। रियल एजुकेशन कैंपेन चला रहे निक सीटन ने इस ऑफर की आलोचना करते हुए कहा कि यह तो ऐसे छात्रों के साथ खिलवाड़ है, जो बाउंड्री पर रहते हैं।

कमजोर छात्रों के लिए इस तरह के ऑफर भीख की तरह होंगे। टेक्सपेयर्स एसोसिएशन के फिओना मेकइवाय ने कहा कि यह उटपटांग ऑफर लोगों के टैक्स चुकाने का मजाक है, जो विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने में सरकार के काम आना चाहिए। कॉलेज के एक होनहार छात्र स्टीफन एशवर्थ ने भी ऑफर से असहमति जताते हुए कहा कि यह ऑफर कुछ छात्रों को निश्चित रूप से पसंद आएगा, जो बाउंड्री पर पास होने के बजाए फेल होना ज्यादा पसंद करेंगे।


देश में पहली बार एक ऐसी टैक्सी आने वाली है जिसमें चालक (ड्राइवर) की जरुरत नही होने वाली है। इस गाड़ी से लोग सिर्फ दस रुपए में आधे घंटे का सफर 10 मिनट में तय कर सकेंगे। जी हां लंदन के बाद अब पहली बार दिल्ली से सटे गुड़गांव में ‘पॉड टैक्सी’ की शुरुआत होने वाली है। ये टैक्सी चार्जेबल बैटरी से चलती है। जो पूरी तरह से पर्यावरण के अनुरूप होगी।

इसके अंदर लगे टच स्क्रीन पर आपको अपनी मंजिल चुननी होगी और ‘पॉड टैक्सी’ आपको सबसे छोटे रास्ते से वहां पहुंचा देगी। यह किसी लिफ्ट को ऑपरेट करना जैसा आसान होता है। इस टैक्‍सी में 4 से 6 लोग एक साथ सफर कर सकते हैं। यानी अब आप ले सकते हैं ‘पॉइंट टू पॉइंट जर्नी’ का मजा।



एक घर को लूटने आए दो हथियारबंद लुटेरों पर जब एक महिला ने झाड़ू लेकर हमला कर दिया तो चोरों को सर पर पांव रखकर भाग निकलने के अलावा कुछ दिखाई नहीं दिया। पुलिस अधिकारी स्टीफन फॉक्स ने कहा कि यह लुटेरे घर की एक खिड़की तोड़कर अंदर घुसे थे।
उन्होंने कहा कि एक 49 वर्षीय व्यक्ति शोर सुनते ही सीढ़ियां उतरकर नीचे आया तो लुटेरों ने उसे बांध दिया। फिर उसका 90 वर्षीय पिता नीचे आया तो बंदूक की नोक पर लुटेरों ने उससे 50 डॉलर छीन लिए।
फिर जब वे सीढ़िया चढ़कर ऊपर जाने लगे तो उनका सामना 43 वर्षीय एक महिला से हुआ जो झाड़ू लेकर उनका इंतजार कर रही थी। उसके हाथ में झाड़ू और उसका रौद्र रूप देखकर लुटेरों के होश उड़ गए और उन्होंने वहां से चंपत होने में ही अपनी भलाई समझी
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